वोः गुनाह या मजबूरी

वोः गुनाह या मजबूरी

विवाह के बाद कई लोगों का जीवन दुश्वार तथा मुश्किलों भरा हो जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं परन्तु दो सबसे बड़े कारण होते हैं –

(1) आपसी सामंजस्य का अभाव
(2) पति-पत्नी दोनों में से किसी एक का अन्य कोई प्रेम संबंध होना। कारण चाहे कोई भी हो परन्तु जीवन नरक समान हो जाता है।

मोटे तौर पर देखा जाए तो ये दोनों ही कारण पारिवारिक और सामाजिक तो हैं ही इनके पीछे ज्योतिष भी कार्य करता है। सामंजस्य के अभाव को तो फिर भी परिजनों के सहयोग से, सामाजिक दबाव से या अन्य किसी प्रकार से एडजस्ट किया जा सकता है लेकिन पति – पत्नी के बीच किसी तीसरे व्यक्ति का आना एक ऐसी चीज है जिसका कोई उपाय नहीं है सिवाय इसके कि वो तीनों (पति-पत्नी तथा वो) खुद मिलकर इसका हल ढूंढें।

अक्सर ऐसे संबंध कई कारणों से बनते हैं, उदाहरण के लिए जीवनसाथी से पर्याप्त प्रेम तथा ध्यान का न मिलना, जीवनसाथी का नीरस या अनाकर्षक होना, जीवनसाथी द्वारा मानसिक व शारीरिक जरूरतें पूरी नहीं कर पाना, इनके अलावा भी कई अन्य कारण हो सकते हैं। इन कारणों को समझकर उनका हल ढूंढा जा सकता है और सुखद दाम्पत्य जीवन में आ रही बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

परन्तु जो बाधाएं ज्योतिष के स्तर पर है या ग्रहों की वजह से आ रही हैं, उन्हें ढूंढना और दूर करना अपने आप में एक समस्या है। अधिकतर ज्योतिषी यह तो बता सकते हैं कि किसी व्यक्ति का मैरिड लाइफ कैसी रहेगी, कहीं कोई दूसरा तो नहीं आएगा, लेकिन यह नहीं बता सकते कि किस ग्रह की वजह से ऐसा हो रहा है और किस उपाय से यह समस्या दूर हो सकती है। अगर समय से ऐसा नहीं हो पाता तो फिर शुरु होता है एक अंतहीन सिलसिला जो एक के बाद एक नई समस्याएं लेकर आता रहता है और अंत में या तो घर टूटता है या फिर कोई एक या दोनों डिप्रेशन में आ जाते हैं, संभव है कोई एक आत्महत्या भी कर लें।

ऐसी ही स्थिति में आकर लोग (विशेष तौर पर महिलाएं) अंधविश्वासों में फंसना शुरु हो जाते हैं। अलग – अलग मंदिरों में, मजारों में मत्थे टेकने लगते हैं, बाबाओं के चंगुल में फंस जाते हैं। यहां उनका मानसिक शोषण तो होता ही है, साथ में पूजा – पाठ और तंत्र – मंत्र के नाम पर शारीरिक शोषण भी होने लगता है।

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