धन और यश पाने के लिए ऐसे करें लक्ष्मीजी की पूजा…

धन और यश पाने के लिए ऐसे करें लक्ष्मीजी की पूजा…

मां लक्ष्मी अपने भक्तों की धन से जुड़ी हर तरह की समस्याएं दूर करती हैं. इतना ही नहीं, देवी साधकों को यश और कीर्ति भी देती हैं.
आइए सबसे पहले जान लेते हैं कि कौन हैं मां लक्ष्मी और इनकी महिमा क्या है.

मां लक्ष्मी की महिमा

— धन और संपत्ति की देवी हैं मां लक्ष्मी.

— माना जाता है कि समुद्र से इनका जन्म हुआ और इन्होंने श्रीविष्णु से विवाह किया.

— इनकी पूजा से धन की प्राप्ति होती है, साथ ही वैभव भी मिलता है.

— अगर लक्ष्मी रुष्ट हो जाएं, तो घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ता है.

— ज्योतिष में शुक्र ग्रह से इनका सम्बन्ध जोड़ा जाता है.

आइए, अब जान लेते हैं कि इनकी पूजा से किन-किन फलों की प्राप्ति होती है…

— इनकी पूजा से केवल धन ही नहीं, बल्कि नाम, यश भी मिलता है.

— इनकी उपासना से दाम्पत्य जीवन भी बेहतर होता है.

— कितनी भी धन की समस्या हो, अगर विधिवत लक्ष्मीजी की पूजा की जाए, तो धन मिलता ही है.

मां लक्ष्मी की पूजा के कुछ नियम है. अगर इन नियमों का पालन न किया जाए, तो मां नाराज भी हो जाती हैं.

लक्ष्मी की पूजा के नियम और सावधानियां…

— मां लक्ष्मी की पूजा सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनकर करनी चाहिए.

— इनकी पूजा का उत्तम समय होता है- मध्य रात्रि.

— मां लक्ष्मी के उस प्रतिकृति की पूजा करनी चाहिए, जिसमें वह गुलाबी कमल के पुष्प पर बैठी हों.

— साथ ही उनके हाथों से धन बरस रहा हो.

— मां लक्ष्मी को गुलाबी पुष्प, विशेषकर कमल चढ़ाना सर्वोत्तम रहता है.

— मां लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप स्फटिक की माला से करने पर वह तुरंत प्रभावशाली होता है.

— मां लक्ष्मी के विशेष स्वरूप हैं, जिनकी उपासना शुक्रवार के दिन करने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है.

अब आपको बताते हैं कि धन से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं के लिए क्या-क्या उपाय करने चाहिए.

नियमित धन प्राप्ति के लिए: धन लक्ष्मी की पूजा

— मां लक्ष्मी के उस स्वरूप की स्थापना करें, जिसमें उनके हाथों से धन गिर रहा हो.

— चित्र के समक्ष घी का एक बड़ा सा दीपक जलाएं.

— इसके बाद उनको इत्र समर्पित करें.

— वही इत्र नियमित रूप से प्रयोग करें.

— वृष, कन्या और मकर राशि‍ वालों के लिए धन लक्ष्मी की पूजा विशेष लाभकारी होती है.

धन की बचत के लिए: धान्य लक्ष्मी की पूजा

— मां लक्ष्मी के उस स्वरूप की स्थापना करें, जिसमें उनके पास अनाज की ढेरी हो.

—या चावल की ढेरी पर लक्ष्मीजी का स्वरूप स्थापित करें.

— उनके सामने घी का दीपक जलाएं, उनको चांदी का सिक्का अर्पित करें.

— पूजा के उपरान्त उसी चांदी के सिक्के को अपने धन स्थान पर रख दें.

— मिथुन, तुला और कुम्भ राशि‍ वालों के लिए धान्य लक्ष्मी के स्वरूप की आराधना विशेष होती है.

कारोबार में धन की प्राप्ति के लिए: गज लक्ष्मी की पूजा

— लक्ष्मीजी के उस स्वरूप की स्थापना करें, जिसमें दोनों तरफ उनके साथ हाथी हों.

— लक्ष्मीजी के समक्ष घी के तीन दीपक जलाएं.

— मां लक्ष्मी को एक गुलाब का फूल अर्पित करें.

— पूजा के उपरान्त उसी गुलाब को अपने धन वाली जगह पर रख दें. रोज इस गुलाब को बदल दें.

— वृष, कन्या, धनु, मकर और मीन राशि‍ के कारोबारी लोगों के लिए गजलक्ष्मी की पूजा विशेष होती है.

नौकरी में धन की बढ़ोतरी के लिए: ऐश्वर्य लक्ष्मी की पूजा

— गणेशजी के साथ लक्ष्मीजी की स्थापना करें.

— गणेशजी को पीले और लक्ष्मीजी को गुलाबी फूल चढ़ाएं.

— लक्ष्मीजी को अष्टगंध चरणों में अर्पित करें.

— नित्य प्रातः स्नान के बाद उसी अष्टगंध का तिलक लगाएं.

— कर्क, वृश्चिक और मीन राशि‍ के लिए ऐश्वर्य लक्ष्मी की पूजा विशेष होती है.

धन के नुकसान से बचने के लिए: वर लक्ष्मी की पूजा

— लक्ष्मीजी के उस स्वरूप की स्थापना करें, जिसमें वह खड़ी हों और धन दे रही हों.

— उनके चरणों में नित्य प्रातः एक रुपये का सिक्का अर्पित करें.

— सिक्कों को जमा करते जाएं और महीने के अंत में किसी सौभाग्यवती स्त्री को दे दें.

— मेष, सिंह और धनु राशि‍ के लोगों के लिए वरलक्ष्मी के स्वरूप की उपासना अदभुत होती है.

अगर आप भी धन से जुड़ी किसी दिक्कत से जूझ रहे हैं, तो लीजिए मां का नाम और देखिए कैसे हो जाएगा आपका कल्याण.

aajtak

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Himani Agyani is an Eminent Astrologer who has chosen Tarot Cards Reading in the Vedic Astrology discipline as her Dreaming Career. In the year 2002, she is Doctorate in Naturopathy Yoga and Meditation. She has become the person, what she definitely wanted to become in her life. She is an expert of Tarot Cards Reading, with an excellent level of intuitive and calculative in nature. Tarot Cards Reading is her passion and it is in her blood as well. She was born in a Brahmin Family (Uttrakhand, India) where her Grand Father and other senior generations were actively involved in the spiritual practices.

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